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भारतीय प्रबंध संस्थान विशाखपट्टणम ने नीति आयोग पहल के अंतर्गत एएसआर जिले के लिए परामर्श कार्यशाला आयोजित की

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19th February 2026

विशाखपट्टणम, 19 फरवरी 2026: भारतीय प्रबंध संस्थान विशाखपट्टणम, जो नीति आयोग के लिए एंकर संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है, ने अल्लूरी सीताराम राजू जिला (एएसआर) के लिए सतत विकास योजना तैयार करने हेतु एक परामर्श कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला में वरिष्ठ जिला अधिकारियों, जिनमें श्री ए. एस. दिनेश कुमार, आईएएस, नीति-निर्माताओं तथा प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य सतत और समावेशी विकास के लिए संयुक्त रूप से एक रूपरेखा तैयार करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राध्यापक विजया मरिसेट्टी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) एवं डॉ. बी. आर. अंबेडकर चेयर, आईआईएम विशाखपट्टणम तथा परियोजना की प्रधान अन्वेषक द्वारा स्वागत भाषण से हुआ। इसके पश्चात संस्थान के निदेशक प्राध्यापक एम. चंद्रशेखर ने उद्घाटन वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. बी. आर. अंबेडकर चेयर प्रोफेसरशिप से युक्त एकमात्र आईआईएम होने के नाते संस्थान सामाजिक प्रभाव वाले परियोजनाओं को संचालित करने की विशिष्ट स्थिति में है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एएसआर जिला सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी से समृद्ध है। अध्ययन का उद्देश्य महत्व-प्रदर्शन विश्लेषण के माध्यम से इन संसाधनों से मूल्य सृजन करना है।

श्री ए. एस. दिनेश कुमार, आईएएस ने अपने संबोधन में कहा कि ‘संपूर्णता अभियान’ के अंतर्गत पाँच विषयों और 46 संकेतकों पर प्रदर्शन सुधार के प्रयास जारी हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश की ‘स्वर्णांध्र विजन 2047’ का उल्लेख किया, जो राज्य को विकसित और समृद्ध बनाने हेतु दस मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें उत्पाद उत्कृष्टता पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिले में कॉफी, काली मिर्च और हल्दी के क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि क्षेत्रीय समृद्धि सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, उन्होंने तीन ‘सी’—कन्वर्जेंस (समेकन), कोलैबोरेशन (सहयोग) और कॉम्पिटिशन (प्रतिस्पर्धा)—के महत्व तथा संस्थागत समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने आईआईएम विशाखापत्तनम की शोध टीम के प्रयासों की सराहना की।

आईआईएम विशाखापत्तनम परिसर में आयोजित यह कार्यशाला छह माह की परियोजना का एक महत्वपूर्ण चरण है। यह पहल के दूसरे चरण का प्रतिनिधित्व करती है, जो हितधारक सह-डिज़ाइन और प्रथम चरण में साक्ष्य-आधारित निष्कर्षों के सत्यापन पर केंद्रित है।

प्राध्यापक विजया मरिसेट्टी ने नीति आयोग परियोजना के प्रारूप निष्कर्ष प्रस्तुत किए। यह रिपोर्ट 627 परिवारों से एकत्रित प्राथमिक आँकड़ों और 213 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के विश्लेषण पर आधारित है। अध्ययन में प्रमुख क्षेत्रीय अंतरालों की पहचान, मानव एवं प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता का मूल्यांकन तथा विकास के लिए ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल का प्रस्ताव शामिल है।
परामर्श प्रक्रिया में हितधारकों के साथ विचार-विमर्श और ‘वर्ल्ड कैफ़े’ पद्धति पर आधारित बहु-हितधारक कार्यशाला शामिल थी। इस संरचित प्रारूप ने सहभागी संवाद, साझा अधिगम और समाधान-उन्मुख चिंतन को प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम का समापन प्रो. अभिनाश सिंह, सहायक प्राध्यापक (अर्थशास्त्र एवं सामाजिक विज्ञान) और सह-प्रधान अन्वेषक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। हितधारकों के सुझावों को सम्मिलित करते हुए अंतिम रिपोर्ट नीति आयोग को प्रस्तुत की जाएगी, जिससे एएसआर जिले की विकास योजना के क्रियान्वयन का मार्गदर्शन किया जा सके।
 

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