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आईआईएम विशाखापट्टनम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का उत्साहपूर्वक आयोजन

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8th March 2026

भारतीय प्रबंध संस्थान, विशाखापट्टनम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साह एवं गौरव के साथ किया गया, जिसमें संस्थान की लैंगिक समावेशन एवं महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।

अपनी स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण करने के अवसर पर, संस्थान निरंतर ऐसा वातावरण विकसित कर रहा है जो महिलाओं की समान भागीदारी एवं नेतृत्व को प्रोत्साहित करता है।

अपने उद्घाटन संबोधन में भारतीय प्रबंध संस्थान, विशाखापट्टनम के निदेशक प्रो. एम. चंद्रशेखर ने विविधता, समानता एवं समावेशन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। उन्होंने बताया कि नवीनतम पीजीपी बैच में 52 प्रतिशत छात्राएँ हैं, जो सशक्त लैंगिक प्रतिनिधित्व को दर्शाता है। वर्तमान में संस्थान में लगभग 53 पूर्णकालिक संकाय सदस्य हैं, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत महिलाएँ हैं, और निकट भविष्य में इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

नेतृत्व में लैंगिक विविधता के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने शोध का उल्लेख किया, जिसमें यह पाया गया है कि जिन संगठनों में उच्च स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व अधिक होता है, वे अधिक लाभप्रदता प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व विविध दृष्टिकोण प्रदान करता है, सहयोगात्मक कार्य वातावरण को प्रोत्साहित करता है तथा संगठनों में नैतिक निर्णय-निर्माण को सुदृढ़ करता है।

उन्होंने संस्थान के इन्क्यूबेटर ‘आईआईएमवी फील्ड (IIMV FIELD)’ की भूमिका का भी उल्लेख किया, जिसने अब तक 190 से अधिक स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेट किया है, जिनमें से 135 से अधिक महिला-नेतृत्व वाले हैं। यह महिला-नेतृत्व वाले नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. गरिमा भगत, आईआरएस, संयुक्त सचिव (भूमि प्रणाली), रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने इस दिवस के ऐतिहासिक महत्व एवं वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दिवस प्रारंभिक श्रमिक एवं राजनीतिक आंदोलनों से उत्पन्न हुआ, जो महिलाओं के लिए समान वेतन एवं बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे थे।

यद्यपि समय के साथ उल्लेखनीय प्रगति हुई है, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस दिवस का निरंतर आयोजन यह दर्शाता है कि लैंगिक असमानताओं को दूर करने की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।

मुख्य वक्ता ने यह भी कहा कि लैंगिक समानता केवल आर्थिक उत्पादकता का विषय नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के समाज में समान भागीदारी के मूल अधिकार से जुड़ा हुआ है। उन्होंने महिलाओं एवं पुरुषों दोनों को गहरे जड़ित रूढ़ियों एवं अवचेतन पूर्वाग्रहों को चुनौती देने के लिए प्रेरित किया।

व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक विकास के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने लक्ष्य निर्धारण, अनुशासन एवं समय प्रबंधन के महत्व को साझा किया। उन्होंने विद्यार्थियों को SMART लक्ष्यों (विशिष्ट, मापनीय, प्राप्त करने योग्य, प्रासंगिक एवं समयबद्ध) को अपनाने, केवल प्रेरणा पर निर्भर रहने के बजाय अनुशासन विकसित करने तथा “अत्यावश्यक बनाम महत्वपूर्ण” निर्णय मैट्रिक्स का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

विद्यार्थियों को निरंतर सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने, भावनात्मक एवं सामाजिक बुद्धिमत्ता विकसित करने तथा शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए भी प्रेरित किया गया। वक्ता ने इस बात पर बल दिया कि व्यक्तिगत विकास जीवनभर जारी रहना चाहिए, और युवा पेशेवरों को निरंतर नए कौशल सीखने, अपने शौक विकसित करने एवं स्वयं को चुनौती देने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर सप्ताह भर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों का भी आयोजन किया गया, जिनके विजेताओं को सम्मानित कर पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ।

यह आयोजन इस बात की पुनः पुष्टि करता है कि महिलाएँ संस्थानों, समाज एवं भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, तथा आईआईएम विशाखापट्टनम शिक्षा, नेतृत्व एवं नवाचार के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।
 

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