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लचीलेपन का विरोधाभास: सामाजिक-सांस्कृतिक, संरचनात्मक और समानता संबंधी तनावों के बीच लचीली कार्य व्यवस्थाओं का सह-निर्माण

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18th March 2026

📢 रिसर्च अपडेट | IIM Visakhapatnam

हमें यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि “The Flexibility Paradox: Co-Creating Flexible Work Arrangements Amid Socio-Cultural, Structural, and Equity Tensions” शीर्षक वाला शोध पत्र, जिसे प्रो. जुमन इक़बाल द्वारा सह-लेखित किया गया है, प्रतिष्ठित जर्नल Personnel Review (ABDC A, Scopus Q1) में प्रकाशन के लिए स्वीकृत हो गया है।

इस अध्ययन का उद्देश्य शहरी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में कार्यरत अभिभावकों (working parents) द्वारा कार्यस्थल पर लचीलापन (flexibility) को कैसे समझा, अनुभव किया और संतुलित किया जाता है, इसका विश्लेषण करना है—विशेष रूप से बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारियों के साथ। यह शोध इस बात पर प्रकाश डालता है कि कार्यस्थल पर लचीलेपन का सह-निर्माण कैसे होता है, और किन सामाजिक-सांस्कृतिक, संरचनात्मक एवं भावनात्मक कारकों का इसके उपयोग और प्रभाव पर असर पड़ता है।

यह अध्ययन कार्य और संगठनात्मक अध्ययन (Work and Organizational Studies) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो आधुनिक कार्यस्थलों में समानता और समावेशन (equity & inclusion) से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाता है।

लेखक को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई!


🔗 पेपर पढ़ें: https://www.emerald.com/pr/article/doi/10.1108/PR-05-2025-0441/1342846/The-flexibility-paradox-co-creating-flexible-work?guestAccessKey=
 

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